कहते हैं स्वस्थ जीवन एक नियामत है। और आजकल तो स्वास्थ्य एक बड़ा बाज़ार भी बन गया है। चारों तरफ सिर्फ सेहत का ही प्रचार हो रहा है। और सभी लोग इस बात पर सहमत हैं की अगर इस राह में कोई एक ऐसा रोड़ा है जो सबसे ज्यादा परेशानियों के लिए जिम्मेदार है तो वो है तनाव। सुबह आप कोई भी चैनल लगा लीजिये, सभी साधू संत तनाव मुक्त जीवन के नुस्खे बताते दिखेंगे। किसी डॉक्टर से बात कीजिये, आधुनिक बीमारियों की जड़ में सिर्फ तनाव ही दिखाई देगा। अब तो तनाव बातचीत का इतना परिचित मुद्दा हो गया है कि छोटे छोटे बच्चों के मुह से भी आप सुन सकते हैं कि लाईफ में बहुत टेंशन हो गई है। सभी की सबसे बड़ी टेंशन है कि इस मुए टेंशन को किसी तरह अपने जीवन से बाहर निकालें। सभी चाहते हैं कि चौबीस घंटे रिलैक्स रहें, कोई तनाव न हो। हर माँ यही दुआ करती है कि उसके बच्चों के जीवन पर किसी तनाव या परेशानी का साया भी न पड़े।पर मुझे लगता है कि हम अपने एक मित्र को शत्रु मानकर अपने जीवन से निष्काषित करने का प्रयास कर रहे हैं। और इस प्रयास में उसके साथ बेगानों की तरह व्यव्हार कर रहे हैं, और तो और, उसे बदनाम भी कर रहे हैं।
मानव विकास के इतिहास को अगर आप देखें तो आप पाएंगे कि मनुष्य शारीरिक रूप से सबसे शक्तिशाली जीव नहीं रहा है। परन्तु फिर भी आज पूरी श्रृष्टि पर राज कर रहा है। इसके अनेक कारण दिए जा सकते है, परन्तु एक कारण सबसे महत्वपूर्ण है वो है मनुष्य ने परिस्थितियों से उपजे तनाव का सही इस्तेमाल किया। अगर आप तनाव को अपना मित्र बना लें तो आप पाएंगे कि तनाव के क्षणों में आप बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। ये तनाव ही है जिसने मनुष्य को संकटों से बचने के बेहतर उपाय सुझाये। तनाव का इस्तेमाल उसने अपने मष्तिष्क का विकास करने में किया। तनाव से मनुष्य ने सोचने की तीव्र क्षमता का विकास किया। तनाव ने उसे सतर्क बनाया है। तनाव ने मानव में अपने दुश्मनों को पहचानने की बेहतर क्षमता विकसित किया है। तनाव ने मनुष्य को तेज़, फुर्तीला एवं बेहतर बनाया है। अगर मनुष्य के जीवन में तनाव का आभाव हो जाये, तो उसे मंदबुद्धि और आलसी होने में देर नहीं लगेगी। जीवन में अगर ज्यादा ही आराम हो जाये तो जीने का न तो आनंद है ना ही अर्थ। सभी बड़े लीडर्स संघर्ष कर के ही आदर्श बने हैं। आज भी हम समाज में उसी व्यक्ति को पसंद करते है जो अनेक तनावों और विपरीत परिस्थतियों का मुकाबला करता हुआ सफल होता है। व्यायाम करने वाले यह जानते हैं कि शरीर के किसी भी अंग को मजबूत और विकसित बनाने के लिए जब उस पर उसकी क्षमता से अधिक भार डाला जाता है, तभी हमारा शरीर अतिरिक्त मांसपेशियों का निर्माण कर उसे भार सहने लायक बनता है। आज पालकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को तनाव का मुकाबला करने के बेहतर तरीके सुझाएँ, न कि तनाव से भागने की सलाह दें। कई बार लोग तनाव से बचने के लिए काम को ही टालने लगते हैं। क्योंकि जीवन में तनाव ही है जो निर्णय लेने के लिए उकसाता है। सफलता प्राप्ति के लिए सबसे पहला कदम है निर्णय लेना। अनेक लोग असफलता के डर से अनिर्णय के शिकार हो जाते हैं और अकर्मण्य ही रह जाते हैं। तनाव को अपना मित्र बनाइये और देखिये आपका मित्र आपको जीवन के लक्ष्य हासिल करने में कैसी मदद करता है। परन्तु इतना अवश्य ध्यान रखें कि मित्र कितना भी अभिन्न क्यों ना हो, उसे अपनी दिनचर्या का एक छोटा भाग ही दें, अन्यथा आपके जीवन के अन्य महत्वपूर्ण हिस्से छूट जायेंगे, और आपके मित्र के हिस्से फिर बदनामी और लांछन ही आयेगी। :-)
This is a platform to people who have an opinion about something and want people to feel as passionately as them.
Saturday, May 18, 2013
तनाव अच्छे हैं।
Subscribe to:
Posts (Atom)